1990 में शेयर खरीदकर भूल गए थे दादाजी, पोते को पता चला कि वह हो गया है 130 करोड़ का मालिक
1990 में शेयर खरीदकर भूल गए थे दादाजी, पोते को पता चला कि वह हो गया है 130 करोड़ का मालिक
पोते ने सोचा भी नहीं होगा कि पिछले दस साल से जो दादा बीमार होकर बिस्तर पर पड़े हैं, उन्होंने कितना बड़ा खजाना शेयर मार्केट में खड़ा कर रखा है।
नई दिल्लीः भाई....किस्मत हो तो ऐसी। दादाजी हों तो ऐसे। जो अपने पोते को एक झटके में 130 करोड़ का मालिक बना जाएं। शेयर के धंधे में किस्मत कैसे चमकती है, यह कोई रवि और उनके दादाजी से अच्छा कौन समझेगा। एक फोन कॉल ने पोते को दस, 20, 30 नहीं पूरे 130 करोड़ का मालिक बना दिया।
जानिए क्या है मामला
दरअसल जी बिजनेस पर शेयर मार्केट से जुड़ा प्रोग्राम चल रहा था। रवि नामक युवक ने कॉल की। कहा कि उनके दादाजी ने 1990 में एमआरएफ 20 हजार शेयर लिए थे। पहले पता नहीं था। अब जाकर दादाजी ने शेयर सर्टिफिकेट सौंपे हैं। क्योंकि वह पिछले दस साल से पैरालिसिस का शिकार रहे। रवि ने कहा कि वह शेयर बेचना चाहते हैं।
इस पर एंकर ने कहा कि शायद शेयर आप अभी नहीं बेच सकते। क्योंकि सेबी की डेडलाइन गुजर चुकी है। ट्रेड नहीं कर पाएंगे। इस पर जी बिजनेस के एंकर ने शेयर मार्केट के एक्सपर्ट से राय मांगी।
क्या कहा एक्सपर्ट ने
एक्सपर्ट ने कहा कि अभी भी मौका है शेयर को भुनाने का। पहले शेयर सर्टिफिकेट के आधार पर खाता खुलवाकर केवाइसी आदि औपचारिकता पूरी कर डीमैट कराना होगा। शेयर को डीमैट में कन्वर्ट करिए। कोई भी डिपोजिटरी पार्टिसिपेंट हों। उनके पास जाइए और डीमैट में तब्दील करिए। इसके बाद अगर शेयर बेचना चाहते हैं तो बेच सकते हैं। हालांकि आपके पास शेयर होल्ड करने का भी चांस रहेगा।
एंकर ने बताई शेयर की वैल्यू तो खुशी से नाच उठे रवि
जब एक्सपर्ट ने 1990 के शेयर बेचने के पूरे तरीके बताए तो फिर एंकर ने शेयर की वैल्यू सर्च करनी शुरू की। रवि को बताया कि हर शेयर की वैल्यू करीब 65 हजार है। इस प्रकार 20 हजार शेयर की कीमत 130 करोड़ बैठती है। इतनी भारी वैल्यू सुनकर रवि तो खुशी से नाच उठे।
जानिए, शेयर मार्केट में क्या होता है डीमैट
डीमैट क्या है, कैसे काम करता है, डीमैट की आवश्यकता क्यों पड़ती है और इसके क्या क्या फायदे हैं विस्तार से हिंदी में जानिये. डीमैट क्या है Demat in Hindi इसको आसानी से ऐसे समझिये. जैसे हम आपने पैसे अपने बैंक के खाते में रखते हैं वैसे ही हम अपने शेयर डीमैट खाते में रखते हैं. जैसे हम यदि बैंक के खाते से नकदी निकलवा लें तो वह नकदी या करंसी पैसे का भौतिक रूप है. मगर जब हम अपने डेबिट कार्ड से किसी दूकानदार को पेमेंट करते हैं तो यह पैसों का इलेक्ट्रॉनिक ट्रान्सफर हुआ. इसी प्रकार यदि हमारे पास शेयर हैं तो हम या तो उन्हें किसी को गिफ्ट देंगे या बाजार में बेच देंगे, दोनों ही परिस्थितियों में शेयरों का एक डीमैट खाते से दूसरे डीमैट खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रान्सफर किया जाएगा. शेयरों को भौतिक रूप में रखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती.
पोते ने सोचा भी नहीं होगा कि पिछले दस साल से जो दादा बीमार होकर बिस्तर पर पड़े हैं, उन्होंने कितना बड़ा खजाना शेयर मार्केट में खड़ा कर रखा है।
नई दिल्लीः भाई....किस्मत हो तो ऐसी। दादाजी हों तो ऐसे। जो अपने पोते को एक झटके में 130 करोड़ का मालिक बना जाएं। शेयर के धंधे में किस्मत कैसे चमकती है, यह कोई रवि और उनके दादाजी से अच्छा कौन समझेगा। एक फोन कॉल ने पोते को दस, 20, 30 नहीं पूरे 130 करोड़ का मालिक बना दिया।
जानिए क्या है मामला
दरअसल जी बिजनेस पर शेयर मार्केट से जुड़ा प्रोग्राम चल रहा था। रवि नामक युवक ने कॉल की। कहा कि उनके दादाजी ने 1990 में एमआरएफ 20 हजार शेयर लिए थे। पहले पता नहीं था। अब जाकर दादाजी ने शेयर सर्टिफिकेट सौंपे हैं। क्योंकि वह पिछले दस साल से पैरालिसिस का शिकार रहे। रवि ने कहा कि वह शेयर बेचना चाहते हैं।
इस पर एंकर ने कहा कि शायद शेयर आप अभी नहीं बेच सकते। क्योंकि सेबी की डेडलाइन गुजर चुकी है। ट्रेड नहीं कर पाएंगे। इस पर जी बिजनेस के एंकर ने शेयर मार्केट के एक्सपर्ट से राय मांगी।
क्या कहा एक्सपर्ट ने
एक्सपर्ट ने कहा कि अभी भी मौका है शेयर को भुनाने का। पहले शेयर सर्टिफिकेट के आधार पर खाता खुलवाकर केवाइसी आदि औपचारिकता पूरी कर डीमैट कराना होगा। शेयर को डीमैट में कन्वर्ट करिए। कोई भी डिपोजिटरी पार्टिसिपेंट हों। उनके पास जाइए और डीमैट में तब्दील करिए। इसके बाद अगर शेयर बेचना चाहते हैं तो बेच सकते हैं। हालांकि आपके पास शेयर होल्ड करने का भी चांस रहेगा।
एंकर ने बताई शेयर की वैल्यू तो खुशी से नाच उठे रवि
जब एक्सपर्ट ने 1990 के शेयर बेचने के पूरे तरीके बताए तो फिर एंकर ने शेयर की वैल्यू सर्च करनी शुरू की। रवि को बताया कि हर शेयर की वैल्यू करीब 65 हजार है। इस प्रकार 20 हजार शेयर की कीमत 130 करोड़ बैठती है। इतनी भारी वैल्यू सुनकर रवि तो खुशी से नाच उठे।
जानिए, शेयर मार्केट में क्या होता है डीमैट
डीमैट क्या है, कैसे काम करता है, डीमैट की आवश्यकता क्यों पड़ती है और इसके क्या क्या फायदे हैं विस्तार से हिंदी में जानिये. डीमैट क्या है Demat in Hindi इसको आसानी से ऐसे समझिये. जैसे हम आपने पैसे अपने बैंक के खाते में रखते हैं वैसे ही हम अपने शेयर डीमैट खाते में रखते हैं. जैसे हम यदि बैंक के खाते से नकदी निकलवा लें तो वह नकदी या करंसी पैसे का भौतिक रूप है. मगर जब हम अपने डेबिट कार्ड से किसी दूकानदार को पेमेंट करते हैं तो यह पैसों का इलेक्ट्रॉनिक ट्रान्सफर हुआ. इसी प्रकार यदि हमारे पास शेयर हैं तो हम या तो उन्हें किसी को गिफ्ट देंगे या बाजार में बेच देंगे, दोनों ही परिस्थितियों में शेयरों का एक डीमैट खाते से दूसरे डीमैट खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रान्सफर किया जाएगा. शेयरों को भौतिक रूप में रखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती.

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