रिलायंस जियो को झटका, वोडाफोन आइडिया और एयरटेल को राहत
24 Sep.2017
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मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की ओर से जारी किए गए उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसके तहत वोडाफोन, आइडिया सेल्युलर, भारतीय एयरटेल लिमिटेड जैसी मोबाइल फोन कंपनियों पर गुटबाजी करने के आरोप की जांच करने का निर्देश दिया गया था। रिलांयस जियो ने सीसीआई के सामने की गई अपनी शिकायत में इन मोबाइल कंपनियों पर गुटबंदी करने का आरोप लगाया था और कहा था कि ये कंपनियां उसके कारोबार में अंडगा लगा रही हैं। यह अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है।
इस शिकायत के बाद सीसीआई ने 21 अप्रैल 2017 को इन सभी दूर संचार कंपनियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद कंपनियों को नोटिस जारी की गई थी। जिसके खिलाफ इन कंपनियों ने सेल्युलर आपरेटर एसोसिएशन आफ इंडिया (सीओएआई) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
न्यायमूर्ति अनूप मोहता व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ ने मामले से जुड़े तथ्यों व कंपनियों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद सीसीआई के आदेश को रद्द करते हुए इन दूरसंचार कंपनियों को बड़ी राहत प्रदान की है। रिलांयस जियो की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने खंडपीठ के सामने दावा किया कि उसे दूर संचार क्षेत्र की कंपनिया जरूरी इंटर कनेक्शन प्वाइंट नहीं उपलब्ध करा रही हैं। जिसके चलते उसके नेटवर्क में बाधा की स्थिति पैदा हो रही है।
यह माममा सीसीआई के क्षेत्राधिकार में नहीं आता
इस पर सीओएआई ने दावा किया कि जियो ने निशुल्क सेवा की शुरुआत की है जिसके चलते बड़ी मात्रा में कॉल हो रहे हैं। इस वजह से जियो के नेटवर्क में बाधा पैदा हो रही है। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि दूर संचार से जुड़े मामले भारतीय दूर संचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) के क्षेत्राधिकार के दायर में आते हैं। समय-समय पर सरकार की तरफ से लाई जाने वाली नीतियों से इस क्षेत्र को नियंत्रित किया जाता है। इस तरह के मामले प्रतिस्पर्धा कानून के तहत नहीं आते। लिहाजा यह मामले सीसीआई के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। इसलिए प्रकरण को लेकर उसकी ओर से जारी की गई नोटिस अवैध व अनुचित है। इसलिए उसे रद्द किया जाता है।
24 Sep.2017
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मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की ओर से जारी किए गए उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसके तहत वोडाफोन, आइडिया सेल्युलर, भारतीय एयरटेल लिमिटेड जैसी मोबाइल फोन कंपनियों पर गुटबाजी करने के आरोप की जांच करने का निर्देश दिया गया था। रिलांयस जियो ने सीसीआई के सामने की गई अपनी शिकायत में इन मोबाइल कंपनियों पर गुटबंदी करने का आरोप लगाया था और कहा था कि ये कंपनियां उसके कारोबार में अंडगा लगा रही हैं। यह अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है।
इस शिकायत के बाद सीसीआई ने 21 अप्रैल 2017 को इन सभी दूर संचार कंपनियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद कंपनियों को नोटिस जारी की गई थी। जिसके खिलाफ इन कंपनियों ने सेल्युलर आपरेटर एसोसिएशन आफ इंडिया (सीओएआई) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
न्यायमूर्ति अनूप मोहता व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ ने मामले से जुड़े तथ्यों व कंपनियों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद सीसीआई के आदेश को रद्द करते हुए इन दूरसंचार कंपनियों को बड़ी राहत प्रदान की है। रिलांयस जियो की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने खंडपीठ के सामने दावा किया कि उसे दूर संचार क्षेत्र की कंपनिया जरूरी इंटर कनेक्शन प्वाइंट नहीं उपलब्ध करा रही हैं। जिसके चलते उसके नेटवर्क में बाधा की स्थिति पैदा हो रही है।
यह माममा सीसीआई के क्षेत्राधिकार में नहीं आता
इस पर सीओएआई ने दावा किया कि जियो ने निशुल्क सेवा की शुरुआत की है जिसके चलते बड़ी मात्रा में कॉल हो रहे हैं। इस वजह से जियो के नेटवर्क में बाधा पैदा हो रही है। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि दूर संचार से जुड़े मामले भारतीय दूर संचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) के क्षेत्राधिकार के दायर में आते हैं। समय-समय पर सरकार की तरफ से लाई जाने वाली नीतियों से इस क्षेत्र को नियंत्रित किया जाता है। इस तरह के मामले प्रतिस्पर्धा कानून के तहत नहीं आते। लिहाजा यह मामले सीसीआई के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। इसलिए प्रकरण को लेकर उसकी ओर से जारी की गई नोटिस अवैध व अनुचित है। इसलिए उसे रद्द किया जाता है।

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