क्या आप जानते है कि मुस्लिम मूंछे क्यों नहीं रखते ? वो क्यों अपनी मूंछ कटवा देते है !
क्या आप जानते है कि मुस्लिम मूंछे क्यों नहीं रखते ? वो क्यों अपनी मूंछ कटवा देते है !
21 Sept. 2017
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hello दोस्तों आप सभी का हमारे चैनल (ASHISH NEWS UPDATE ) में स्वागत है , आज हम आपको मुस्लिमों की उस प्रथा के बारे में बतायेंगे ,जिसमे आपको ये पता चल जायेगा की मुस्लिम लोग अपनी मूंछ क्यों नहीं रखते !
दोस्तों अक्सर आप सभी लोगो ने देखा होगा की मुस्लिम लोग दाड़ी तो रखते है लेकिन उनकी मूंछ नहीं होती। तो इसकी क्या वजह हो सकती है की वो लोग अपनी दाड़ी तो लम्बी लम्बी नाडा लेते है मगर अपनी मूंछ नहीं बढ़ाते। तो चलिए बताते है आपको इसकी वजह -
मूंछो को न रखने की वजह -
इस्लाम से पहले अरब में लोग प्राक्रतिक देवी देवताओं की बड़ी बड़ी मूर्तियाँ बनाकर उनकी पूजा करते थे । जिन्हें आज कल हम पेंगस कहते है । जबकि इस्लाम मूर्ति पूजा के उल्ट निराकार अल्लाह में विश्वाश करता है। एक हदीस के मुताबिक हजरत मोहम्मद सल्लाहू अलई वस्लम ने कहा की पेंगस के विपरीत करो । क्योकि पेंगस बड़ी बड़ी मूछे रखते थे और दाड़ी साफ़ रखवा देते थे । इसलिए मुस्लिम इसके विपरीत मूंछे कटवाने लगे और दाड़ी को लम्बी रखने लगे।
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एक अन्य मात के अनुसार मूंछे कटवाना अरब संस्कृति का हिस्सा है क्योकि अक्सर वहां रेतीली हवाए चलती रहती थी, जिससे रेत के कड़ मूंछो में फास जाते थे और खाने के साथ मूह में चेले जाते थे। इसलिए मूंछो को कटवाने या छोटी करवाने का रिवाज शुरू हुआ ।
तो दोस्तों अगर आपको हमारी ये जानकारी पसंद आयी हो तो हमारे चैनल को Follow करना न भूले ।
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मूंछो को न रखने की वजह -
इस्लाम से पहले अरब में लोग प्राक्रतिक देवी देवताओं की बड़ी बड़ी मूर्तियाँ बनाकर उनकी पूजा करते थे । जिन्हें आज कल हम पेंगस कहते है । जबकि इस्लाम मूर्ति पूजा के उल्ट निराकार अल्लाह में विश्वाश करता है। एक हदीस के मुताबिक हजरत मोहम्मद सल्लाहू अलई वस्लम ने कहा की पेंगस के विपरीत करो । क्योकि पेंगस बड़ी बड़ी मूछे रखते थे और दाड़ी साफ़ रखवा देते थे । इसलिए मुस्लिम इसके विपरीत मूंछे कटवाने लगे और दाड़ी को लम्बी रखने लगे।
एक अन्य मात के अनुसार मूंछे कटवाना अरब संस्कृति का हिस्सा है क्योकि अक्सर वहां रेतीली हवाए चलती रहती थी, जिससे रेत के कड़ मूंछो में फास जाते थे और खाने के साथ मूह में चेले जाते थे। इसलिए मूंछो को कटवाने या छोटी करवाने का रिवाज शुरू हुआ ।
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